मातृ शक्ति जागरूक

आज के नए टेक्नोलॉजी के दौर पे ग्रामीण महिलाएं आत्म निर्भर, शसक्त और जागरूक बनें।महिलाएं विकास,जिम्मेदारी के लिए आगे बढे ताकि वे किसी भी कार्य क्षेत्र में पीछे न रहे।आजकल के विचार शिक्षित व सभ्य नारी,जागरूक घर में संस्कार उत्पन्न करती है साथ ही महिला समाज के प्रति आईना होती है। जंहा तक मुझे जानकारी है कि महिलाएं अपनी बेटियों कि प्रति और लापरवाही नही बरतें उन्हें अधिक से अधिक शिक्षित,विचार मंथन करें उन्हें आत्म निर्भर एवं जागरूक बनाएं। शिक्षित बेटी दो घरों को रोशन करती है।एवं साथ भारत के संविधान अनुच्छेद14तहत पुरुष के बराबर महिलाओं को सम्मान अधिकार दिया है।आज महिलाओं पर हो रहे अत्याचार का कारण नशा है,आजकल के छोटे छोटे फैशन कपड़े जिसकी वजह से घरों मे दिनों दिन बहुत बड़ी घोर समस्या  रहता है। समाज में फैली बुराईयों को जड़ से खत्म करने के लिए महिलाएं संकल्प के के देश,समाज के प्रति आगे आना होगा।तभी भ्रूण हत्या, अंधविश्वास, अनपढ़ता, दहेज प्रथा, बाल विवाह,आदि बुराईयों को रोकने में अहम योगदान देना होगा।महिलाओं का पूर्ण रूप से साक्षर और जागरूक होना बहुत ही जरूरी है।यदि समय रहते नहीं किया गया तो आज कल नए जनरेशन में कई प्रकार समस्याओं का देखने को मिलते रहता है। इन सभी सारी बातों को ध्यान में रखते हुए,हम सभी उचित कदम उठाना होगा। भ्रूण हत्या कानूनी अपराध के साथ साथ बहुत बड़ा पाप भी है।मेरे जानकारी के मुताबिक जनसंख्या के आंकड़ों के अनुसार कई जिलो में लड़कियों की संख्या का काफी कम होती जा रही है। यह लड़कियों के प्रति अलगाव और भ्रूण हत्याओं का परिणाम है। याया[मां] को अपना पवित्र रिश्ता हर हाल में बनाए रखना चाहिए। लड़का,लड़कियों के प्रति किसी पर भेदभाव नहीं करना चाहिए।बल्कि यह जन्मसिद्ध अधिकार है।

....✍उमेन्द्र होड़ी कोया

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