नार में अब ऐसे लोन ना हो।
आंगन तो हो पर बरसात ना हो।

लोन में कोई आदमी हो ऐशा।
आदमी में जहां प्रेम ना हो।

नहीं देखे हमने बेईमान ना हो।
आगे पीछे कोई सच्चाई ना हो।

याद आ सके तेरे बातों को
हम भुला दिए अपने को।

आदमी इतना भी बड़ा या छोटा ना हो।
अच्छे बुरे का पहचान ना हो।

✍उमेन्द्र होड़ी कोया

Comments

Popular Posts