शिक्षा कि जूनून
आज भारत में अन्य देशों में अध्ययन अध्यापन संबंध में बहुत चर्चा होती रहती है और शिक्षण प्रशिक्षण के जो पाठ्यक्रम एवं पद्धति बनती है वह अध्यापन एवं अध्यापक को आधार मानकर होती है अध्ययन और अध्येता को नहीं।मूलतः बदल होने की आवश्यकता है।
अंग्रेजी भाषा में पढ़ने के लिए क्रियापद है टो लर्न एवं पढ़ने के लिए टू टीच यह दोनों क्रिया पद के मूल रूप हैं और स्वतंत्र रूप हैं इसका अर्थ यह होता है कि यह दोनों क्रियाएं भी एक दूसरे से स्वतंत्र हैं परंतु भारत की एक भी भाषा में यह दोनों स्वतंत्र की उपाधि नहीं है पढ़ना और पढ़ाना उसका प्रेरक रूप । अर्थात पढ़ने के लिए प्रेरित करने को ही पढ़ाना कहते हैं। अधिक पढ़ने पर करने की आवश्यकता है। आज अध्यापन पद्धती, अध्यापक शिक्षा, पाठन सामग्री आदि के संबंध में बहुत चर्चा होते रहता है। परंतु भारत में जैसा हुआ है अध्ययन पद्धति, अध्ययन सामग्री, अध्ययन कला आंधी पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रथम तो अध्ययन के उपकरणों के संबंध में विचार करें।आप सभी का क्या राय है।सुझाव देवें......
✍उमेन्द्र होड़ी कोया
अंग्रेजी भाषा में पढ़ने के लिए क्रियापद है टो लर्न एवं पढ़ने के लिए टू टीच यह दोनों क्रिया पद के मूल रूप हैं और स्वतंत्र रूप हैं इसका अर्थ यह होता है कि यह दोनों क्रियाएं भी एक दूसरे से स्वतंत्र हैं परंतु भारत की एक भी भाषा में यह दोनों स्वतंत्र की उपाधि नहीं है पढ़ना और पढ़ाना उसका प्रेरक रूप । अर्थात पढ़ने के लिए प्रेरित करने को ही पढ़ाना कहते हैं। अधिक पढ़ने पर करने की आवश्यकता है। आज अध्यापन पद्धती, अध्यापक शिक्षा, पाठन सामग्री आदि के संबंध में बहुत चर्चा होते रहता है। परंतु भारत में जैसा हुआ है अध्ययन पद्धति, अध्ययन सामग्री, अध्ययन कला आंधी पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रथम तो अध्ययन के उपकरणों के संबंध में विचार करें।आप सभी का क्या राय है।सुझाव देवें......
✍उमेन्द्र होड़ी कोया
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